महाराज! आज मैं जिस स्थिति में हूँ, उसमें रहने से क्या लाभ? पाण्डव दिन-प्रतिदिन उन्नति कर रहे हैं और हमारी उन्नति (प्रगति) अस्थिर है - वह अधिक समय तक टिकने वाली नहीं लगती।
Maharaj! What is the use of my living in the condition I am in today? The Pandavas are progressing day by day and our growth (progress) is unstable- it does not seem to last for long.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि दुर्योधनसंतापे पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें दुर्योधनसंतापविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥