श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 63: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको उकसाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.63.20 
नाप्राप्य पाण्डवैश्वर्यं संशयो मे भविष्यति।
अवाप्स्ये वा श्रियं तां हि शयिष्ये वा हतो युधि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जब तक मैं पाण्डवों का धन प्राप्त न कर लूँ, तब तक मैं दुविधा में ही रहूँगा। अतः या तो मैं पाण्डवों का धन प्राप्त कर लूँगा या युद्ध में मरकर सो जाऊँगा (तभी मेरी दुविधा समाप्त होगी)।॥ 20॥
 
Until I obtain the wealth of the Pandavas, I will remain in a dilemma. So either I will obtain the wealth of the Pandavas or I will die in battle and go to sleep (only then will my dilemma end).॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)