Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.62.11: हे भरतश्रेष्ठ! यज्ञ में धन दान करो, जो चाहो भोगो और स्त्रियों के साथ क्रीड़ा करते समय निर्भय होकर शान्त रहो। 11॥ | mahabharat अध्याय 2.62: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भरतश्रेष्ठ! यज्ञ में धन दान करो, जो चाहो भोगो और स्त्रियों के साथ क्रीड़ा करते समय निर्भय होकर शान्त रहो। 11॥
Bharatshrestha! Donate money in the Yagya, enjoy whatever you like and remain calm while playing with women without fear. 11॥
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि दुर्योधनसंतापे चतु:पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें दुर्योधनसंतापविषयक चौवनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल १२ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥