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mahabharat 2.62.1: धृतराष्ट्र बोले - दुर्योधन! तुम मेरी ज्येष्ठ पुत्र हो, जो ज्येष्ठ रानी के गर्भ से उत्पन्न हुए हो। पुत्र! पाण्डवों से द्वेष न करो; क्योंकि जो मनुष्य दूसरों से द्वेष करता है, वह मृत्यु के समान दुःख भोगता है।   |   mahabharat अध्याय 2.62: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 62: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.62.1 
धृतराष्ट्र उवाच
त्वं वै ज्येष्ठो ज्यैष्ठिनेय: पुत्र मा पाण्डवान् द्विष:।
द्वेष्टा ह्यसुखमादत्ते यथैव निधनं तथा॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - दुर्योधन! तुम मेरी ज्येष्ठ पुत्र हो, जो ज्येष्ठ रानी के गर्भ से उत्पन्न हुए हो। पुत्र! पाण्डवों से द्वेष न करो; क्योंकि जो मनुष्य दूसरों से द्वेष करता है, वह मृत्यु के समान दुःख भोगता है।
 
Dhritarashtra said - Duryodhan! You are my eldest son, born from the womb of the eldest queen. Son! Do not hate the Pandavas; because a person who hates others suffers pain like death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)