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mahabharat 2.61.19: धृष्टद्युम्न, पाँचों पाण्डव, सात्यकि और आठवें श्रीकृष्ण - केवल ये ही धैर्यपूर्वक स्थिर रहे। ये सभी वीर हैं और परस्पर प्रेम रखते हैं। 19॥   |   mahabharat अध्याय 2.61: दुर्योधनद्वारा युधिष्ठिरके अभिषेकका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 61: दुर्योधनद्वारा युधिष्ठिरके अभिषेकका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.61.19 
धृष्टद्युम्न: पाण्डवाश्च सात्यकि: केशवोऽष्टम:।
सत्त्वस्था वीर्यसम्पन्ना ह्यन्योन्यप्रियदर्शना:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न, पाँचों पाण्डव, सात्यकि और आठवें श्रीकृष्ण - केवल ये ही धैर्यपूर्वक स्थिर रहे। ये सभी वीर हैं और परस्पर प्रेम रखते हैं। 19॥
 
Dhrishtadyumna, the five Pandavas, Satyaki and the eighth Shri Krishna - only these remained patiently stable. All of them are brave and love each other. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)