श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.60.47 
दशान्यानि सहस्राणि यतीनामूर्ध्वरेतसाम्।
भुञ्जते रुक्मपात्रीभिर्युधिष्ठिरनिवेशने॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार युधिष्ठिर के महल में दस हजार अन्य ऊर्ध्वरेता तपस्वी भी स्वर्ण की थालियों में भोजन करते हैं ॥ 47॥
 
Similarly, in Yudhishthira's palace, ten thousand other Urdhvareta ascetics also eat their food on golden plates. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)