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mahabharat 2.60.43-44h: युधिष्ठिर के यज्ञ में कहीं कच्चा अन्न तौला जा रहा था, कहीं पकाया जा रहा था, कहीं परोसा जा रहा था और कहीं ब्राह्मणों द्वारा पवित्र स्तोत्रों का पाठ करने की ध्वनि सुनाई दे रही थी।   |   mahabharat अध्याय 2.60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  2.60.43-44h 
प्रमीयमाणमामं च पच्यमानं तथैव च॥ ४३॥
विसृज्यमानं चान्यत्र पुण्याहस्वन एव च।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर के यज्ञ में कहीं कच्चा अन्न तौला जा रहा था, कहीं पकाया जा रहा था, कहीं परोसा जा रहा था और कहीं ब्राह्मणों द्वारा पवित्र स्तोत्रों का पाठ करने की ध्वनि सुनाई दे रही थी।
 
In Yudhishthira's sacrifice, somewhere raw food was being weighed, somewhere it was being cooked, somewhere it was being served and somewhere the sound of the Brahmins reciting the holy hymns could be heard. 43 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)