Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.60.36-38h: उन वीर सिंहली योद्धाओं ने अपने शरीर रत्नजटित वस्त्रों से ढँके हुए थे। उनकी त्वचा काली थी और आँखों के कोने लाल थे। वे सभी द्वार पर उपहार लिए खड़े थे। ब्राह्मण, पराजित क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जो सेवा करना चाहते थे, उन्होंने सहर्ष अपनी भेंटें वहाँ अर्पित कीं।   |   mahabharat अध्याय 2.60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक 36-38h
 
 
श्लोक  2.60.36-38h 
संवृता मणिचीरैस्तु श्यामास्ताम्रान्तलोचना:॥ ३६॥
ता गृहीत्वा नरास्तत्र द्वारि तिष्ठन्ति वारिता:।
प्रीत्यर्थं ब्राह्मणाश्चैव क्षत्रियाश्च विनिर्जिता:॥ ३७॥
उपाजह्रुर्विशश्चैव शूद्रा: शुश्रूषवस्तथा।
 
 
अनुवाद
उन वीर सिंहली योद्धाओं ने अपने शरीर रत्नजटित वस्त्रों से ढँके हुए थे। उनकी त्वचा काली थी और आँखों के कोने लाल थे। वे सभी द्वार पर उपहार लिए खड़े थे। ब्राह्मण, पराजित क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जो सेवा करना चाहते थे, उन्होंने सहर्ष अपनी भेंटें वहाँ अर्पित कीं।
 
Those brave Sinhalese warriors covered their bodies with jeweled clothes. Their skin was black and the corners of their eyes were red. They were all standing at the door, holding those gifts. Brahmins, defeated Kshatriyas, Vaishyas and Shudras who wished to serve, gladly offered their gifts there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)