श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  2.60.34-35h 
मणिरत्नानि भास्वन्ति काञ्चनं सूक्ष्मवस्त्रकम्॥ ३४॥
चोलपाण्डॺावपि द्वारं न लेभाते ह्युपस्थितौ।
 
 
अनुवाद
चोल और पाण्डव देश के राजा चमकते हुए बहुमूल्य रत्न, स्वर्ण और सुन्दर वस्त्र लेकर आये; परन्तु उन्हें भी अन्दर जाने का मार्ग नहीं मिला।
 
The kings of the Chola and Pandava countries arrived with glittering precious stones, gold and fine clothes; but they too could not find a way to enter inside. 34 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)