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mahabharat 2.60.27-28: हे राजन! राजा वसुदान ने पाण्डवों को पांशु देश से छब्बीस हाथी, स्वर्ण मालाओं से सुसज्जित, वेग और बल से युक्त दो हजार युवा घोड़े तथा अन्य सभी प्रकार के उपहार दिये।   |   mahabharat अध्याय 2.60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  2.60.27-28 
पांशुराष्ट्राद् वसुदानो राजा षड्‍‍विंशतिं गजान्।
अश्वानां च सहस्रे द्वे राजन् काञ्चनमालिनाम्॥ २७॥
जवसत्त्वोपपन्नानां वयस्थानां नराधिप।
बलिं च कृत्स्नमादाय पाण्डवेभ्यो न्यवेदयत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! राजा वसुदान ने पाण्डवों को पांशु देश से छब्बीस हाथी, स्वर्ण मालाओं से सुसज्जित, वेग और बल से युक्त दो हजार युवा घोड़े तथा अन्य सभी प्रकार के उपहार दिये।
 
O King! King Vasudana presented to the Pandavas twenty-six elephants from the country of Panshu, two thousand young horses adorned with golden garlands, full of speed and power, and all kinds of other gifts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)