Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.60.20-21: तत्पश्चात्, प्रत्येक क्षमाशील और कुलीन राजा काम्यक सरोवर के निकट उत्पन्न हुए एक-एक सहस्त्र हाथियों का वध करके द्वार में प्रवेश करते थे। उन हाथियों के दाँत हलदण्ड के समान लम्बे थे। उन्हें बाँधने वाली रस्सियाँ सोने की बनी थीं। उन हाथियों का रंग कमल के समान श्वेत था। उनकी पीठ पर डोल रहा था। वे पर्वतों के समान और उन्मत्त प्रतीत होते थे। | mahabharat अध्याय 2.60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, प्रत्येक क्षमाशील और कुलीन राजा काम्यक सरोवर के निकट उत्पन्न हुए एक-एक सहस्त्र हाथियों का वध करके द्वार में प्रवेश करते थे। उन हाथियों के दाँत हलदण्ड के समान लम्बे थे। उन्हें बाँधने वाली रस्सियाँ सोने की बनी थीं। उन हाथियों का रंग कमल के समान श्वेत था। उनकी पीठ पर डोल रहा था। वे पर्वतों के समान और उन्मत्त प्रतीत होते थे।
Thereafter, each forgiving and noble king entered the gate after offering a thousand elephants born near the Kamyak lake. The tusks of those elephants were as long as haldanda. The ropes used to tie them were made of gold. The colour of those elephants was white like lotus. There was a swaying on their backs. They looked like mountains and appeared mad.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥