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mahabharat 2.60.13-17: किरात, दरद, दर्वा, शूर, यमक, औदुंबर, दुर्विभाग, पारद, बाह्लीक, कश्मीर, कुमार, घोरक, हंसकायन, शिबि, त्रिगर्त, यौधेय, भद्र, केकय, अम्बष्ठ, कौकुरा, तार्क्ष्य, वस्त्रप, पहलव, वष्टल, मौलेय, क्षुद्रक, मालव, शौंडिक, कुक्कुर, शक, अंग, वंग, पुण्ड्र। शानवत्य और गया - ये श्रेष्ठ क्षत्रिय राजकुमार, जो कुलीन कुल में उत्पन्न हुए थे और शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित थे, सैकड़ों की संख्या में पंक्तियों में खड़े थे और शत्रु रहित युधिष्ठिर को बहुत सारी संपत्ति दे रहे थे॥13-17॥   |   mahabharat अध्याय 2.60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 60: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक 13-17
 
 
श्लोक  2.60.13-17 
कैराता दरदा दर्वा: शूरा वै यमकास्तथा।
औदुम्बरा दुर्विभागा: पारदा बाह्लिकै: सह॥ १३॥
काश्मीराश्च कुमाराश्च घोरका हंसकायना:।
शिबित्रिगर्तयौधेया राजन्या भद्रकेकया:॥ १४॥
अम्बष्ठा: कौकुरास्तार्क्ष्या वस्त्रपा: पह्लवै: सह।
वशातलाश्च मौलेया: सह क्षुद्रकमालवै:॥ १५॥
शौण्डिका: कुकुराश्चैव शकाश्चैव विशाम्पते।
अङ्गा वङ्गाश्च पुण्ड्राश्च शाणवत्या गयास्तथा॥ १६॥
सुजातय: श्रेणिमन्त: श्रेयांस: शस्त्रधारिण:।
अहार्षु: क्षत्रिया वित्तं शतशोऽजातशत्रवे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
किरात, दरद, दर्वा, शूर, यमक, औदुंबर, दुर्विभाग, पारद, बाह्लीक, कश्मीर, कुमार, घोरक, हंसकायन, शिबि, त्रिगर्त, यौधेय, भद्र, केकय, अम्बष्ठ, कौकुरा, तार्क्ष्य, वस्त्रप, पहलव, वष्टल, मौलेय, क्षुद्रक, मालव, शौंडिक, कुक्कुर, शक, अंग, वंग, पुण्ड्र। शानवत्य और गया - ये श्रेष्ठ क्षत्रिय राजकुमार, जो कुलीन कुल में उत्पन्न हुए थे और शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित थे, सैकड़ों की संख्या में पंक्तियों में खड़े थे और शत्रु रहित युधिष्ठिर को बहुत सारी संपत्ति दे रहे थे॥13-17॥
 
Kirata, Darada, Darva, Shur, Yamaka, Audumbara, Durvibhaga, Parad, Bahlika, Kashmir, Kumara, Ghoraka, Hansakayana, Shibi, Trigarta, Yaudheya, Bhadra, Kekaya, Ambastha, Kaukura, Tarkshya, Vastrapa, Pahlava, Vashtal, Mauleya, Kshudraka, Malava, Shaundika, Kukkur, Shaka, Ang, Vang, Pundra, Shaanvatya and Gaya - these excellent Kshatriya princes born in noble families and armed with weapons, were standing in rows in hundreds and offering lots of wealth to Yudhishthira, who was without enemies.॥13-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)