Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.6.4: प्रभु! हम भी उसी उत्तम मार्ग पर चलना चाहते हैं, परन्तु जिस प्रकार वे दृढ़ निश्चयी महात्मा चलते थे, उसी प्रकार हम नहीं चल पाते॥4॥ | mahabharat अध्याय 2.6: युधिष्ठिरकी दिव्य सभाओंके विषयमें जिज्ञासा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वयं तु सत्पथं तेषां यातुमिच्छामहे प्रभो।
न तु शक्यं तथा गन्तुं यथा तैर्नियतात्मभि:॥ ४॥
अनुवाद
प्रभु! हम भी उसी उत्तम मार्ग पर चलना चाहते हैं, परन्तु जिस प्रकार वे दृढ़ निश्चयी महात्मा चलते थे, उसी प्रकार हम नहीं चल पाते॥4॥
Prabhu! We too want to follow the same good path, but we are unable to walk in the same way as those great souls with determined souls used to walk. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥