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mahabharat 2.6.3: इसमें कोई संदेह नहीं कि प्राचीन काल के राजा जो भी कार्य करते थे, वह प्रत्येक कार्य न्यायसंगत होता था, उसका कोई कारण होता था और उसका कोई विशिष्ट उद्देश्य होता था ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 2.6: युधिष्ठिरकी दिव्य सभाओंके विषयमें जिज्ञासा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 6: युधिष्ठिरकी दिव्य सभाओंके विषयमें जिज्ञासा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.6.3 
राजभिर्यद् यथा कार्यं पुरा वै तन्न संशय:।
यथान्यायोपनीतार्थं कृतं हेतुमदर्थवत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि प्राचीन काल के राजा जो भी कार्य करते थे, वह प्रत्येक कार्य न्यायसंगत होता था, उसका कोई कारण होता था और उसका कोई विशिष्ट उद्देश्य होता था ॥3॥
 
There is no doubt that whatever work the kings of ancient times did, every task was justifiable, had a reason and had a specific purpose. ॥3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)