श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 6: युधिष्ठिरकी दिव्य सभाओंके विषयमें जिज्ञासा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.6.18 
एतत् सर्वं यथान्यायं ब्रह्मर्षे वदतस्तव।
श्रोतुमिच्छाम सहिता: परं कौतूहलं हि न:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षि! हम सब लोग आपके मुख से ये सब बातें विधिपूर्वक सुनना चाहते हैं। हमारे मन में इसके लिए बड़ी जिज्ञासा है।॥18॥
 
‘Brahmarshi! We all want to hear all these things from your mouth in a proper manner. We have a great curiosity about it in our minds.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)