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नारद उवाच
मानुषेषु न मे तात दृष्टपूर्वा न च श्रुता।
सभा मणिमयी राजन् यथेयं तव भारत॥ १०॥
अनुवाद
नारद बोले, "हे प्रिय भाई! भरतवंश के राजा! मैंने मानव लोक में आपके समान बहुमूल्य रत्नों और बहुमूल्य रत्नों से निर्मित दरबार न तो कभी देखा है और न ही सुना है।"
Narada said, "O dear brother! King of the Bharata dynasty! I have never seen or heard of such a court as yours, made of precious stones and precious stones, in the human world."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥