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mahabharat 2.59.d7-d8: मुझे और अन्य भूमिपालों को अचेत देखकर वे ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। उस समय अर्जुन बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने एक श्रेष्ठ ब्राह्मण को पाँच सौ स्वस्थ बैल दिए। वे बैल गाड़ी का भार उठाने में सक्षम थे और उनके सींग सोने से मढ़े हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 2.59: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 59: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक d7-d8
 
 
श्लोक  2.59.d7-d8 
विसंज्ञान् भूमिपान् दृष्ट्वा मां च ते प्राहसंस्तदा॥
तत: प्रहृष्टो बीभत्सुरददाद्धेमशृङ्गिण:।
शतान्यनडुहां पञ्च द्विजमुख्याय भारत॥
 
 
अनुवाद
मुझे और अन्य भूमिपालों को अचेत देखकर वे ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। उस समय अर्जुन बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने एक श्रेष्ठ ब्राह्मण को पाँच सौ स्वस्थ बैल दिए। वे बैल गाड़ी का भार उठाने में सक्षम थे और उनके सींग सोने से मढ़े हुए थे।
 
Seeing me and the other Bhumipalas unconscious, they started laughing loudly. At that time Arjuna was very happy and gave five hundred healthy bulls to a great Brahmin. Those bulls were capable of carrying the load of the cart and their horns were plated with gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)