Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.59.d4-d5: भोजन अर्पित करने पर वह शंख स्वतः ही बज उठता था। उस समय उस शंख की ध्वनि बहुत तेज़ फैलती थी। उसकी तीव्र ध्वनि के कारण सभी भूमिपाल अपनी ऊर्जा खोकर पृथ्वी पर गिर पड़े। | mahabharat अध्याय 2.59: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो अन्नदाने नदति स ननादाधिकं तदा॥
प्रणादाद् भूमिपास्तस्य पेतुर्हीना: स्वतेजसा॥
अनुवाद
भोजन अर्पित करने पर वह शंख स्वतः ही बज उठता था। उस समय उस शंख की ध्वनि बहुत तेज़ फैलती थी। उसकी तीव्र ध्वनि के कारण सभी भूमिपाल अपनी ऊर्जा खोकर पृथ्वी पर गिर पड़े।
That conch would sound on its own when food was offered. At that time, that conch spread its sound very loudly. Due to its deep sound, all the Bhumipals lost their energy and fell on the earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥