श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 59: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक 21-23h
 
 
श्लोक  2.59.21-23h 
इन्द्रगोपकवर्णाभाञ्छुकवर्णान् मनोजवान्॥ २१॥
तथैवेन्द्रायुधनिभान् संध्याभ्रसदृशानपि।
अनेकवर्णानारण्यान् गृहीत्वाश्वान् महाजवान्॥ २२॥
जातरूपमनर्घ्यं च ददुस्तस्यैकपादका:।
 
 
अनुवाद
एकपदेश के राजाओं ने उन्हें इन्द्रगोप (बीरबाहुति) के समान लाल, तोते के समान हरे, मन के समान तीव्र, इन्द्रधनुष के समान बहुरंगी, संध्या के बादलों के समान लाल, अनेक रंगों वाले, अत्यन्त वेगवान तथा बहुमूल्य स्वर्ण जैसे जंगली घोड़े भेंट किये।
 
The kings of Ekapadesh presented to him wild horses as red as the Indragop (Birbahuti), green as the parrot, swift as the mind, multi-coloured like the rainbow, red like the evening clouds and of many colours, very fast and precious gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)