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mahabharat 2.59.1: दुर्योधन बोला, 'भरत! मैंने पाण्डवों के यज्ञ के लिए जो बहुमूल्य रत्न और धन देखा था, जो विभिन्न देशों के राजाओं द्वारा लाया गया था, उसके विषय में मैं तुम्हें बताता हूँ। सुनो।'   |   mahabharat अध्याय 2.59: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 59: युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.59.1 
दुर्योधन उवाच
यन्मया पाण्डवेयानां दृष्टं तच्छृणु भारत।
आहृतं भूमिपालैर्हि वसु मुख्यं ततस्तत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन बोला, 'भरत! मैंने पाण्डवों के यज्ञ के लिए जो बहुमूल्य रत्न और धन देखा था, जो विभिन्न देशों के राजाओं द्वारा लाया गया था, उसके विषय में मैं तुम्हें बताता हूँ। सुनो।'
 
Duryodhan said, 'Bharata! I will tell you about the precious jewels and wealth that I had seen for the Pandavas' sacrifice, which were brought by kings from various countries. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)