श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.58.5 
वैशम्पायन उवाच
शृणु मे विस्तरेणेमां कथां भारतसत्तम।
भूय एव महाराज यदि ते श्रवणे मति:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले, "हे भरतवंश के मुखिया! राजा जनमेजय! यदि आपका मन यह सब सुनने में प्रवृत्त हो तो इस कथा को पुनः विस्तारपूर्वक सुनिए।"
 
Vaishmpayana said, "O head of the Bharata dynasty! King Janamejaya! If your mind is inclined towards listening to all this then listen to this story again in detail." 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)