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mahabharat 2.58.36: उस सभा में मैंने जिन रत्नों के नाम देखे थे, उनके नाम मैंने पहले कभी नहीं सुने थे; इसलिए इन सब बातों से मुझे बड़ा दुःख हो रहा है ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 2.58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.58.36 
नामधेयानि रत्नानां पुरस्तान्न श्रुतानि मे।
यानि दृष्टानि मे तस्यां मनस्तपति तच्च मे॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उस सभा में मैंने जिन रत्नों के नाम देखे थे, उनके नाम मैंने पहले कभी नहीं सुने थे; इसलिए इन सब बातों से मुझे बड़ा दुःख हो रहा है ॥ 36॥
 
I had never heard the names of the gems I saw in that assembly before; therefore, I am feeling very sad about all these things. ॥ 36॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि दुर्योधनसंतापे पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें दुर्योधनसंतापविषयक पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)