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mahabharat 2.58.34: वहाँ सहदेव ने मुझे बार-बार यह कहकर आश्चर्यचकित कर दिया, 'राजन्, यह द्वार है, यहाँ आओ।'   |   mahabharat अध्याय 2.58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.58.34 
उवाच सहदेवस्तु तत्र मां विस्मयन्निव।
इदं द्वारमितो गच्छ राजन्निति पुन: पुन:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सहदेव ने मुझे बार-बार यह कहकर आश्चर्यचकित कर दिया, 'राजन्, यह द्वार है, यहाँ आओ।'
 
There Sahadeva astonished me by saying repeatedly, 'King, this is the door, come here.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)