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mahabharat 2.58.30: वहाँ श्रीकृष्ण और अर्जुन मेरी ओर देखकर जोर-जोर से हँसने लगे। द्रौपदी और अन्य स्त्रियाँ भी हँस रही थीं, जिससे मेरा हृदय दुख रहा था।   |   mahabharat अध्याय 2.58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.58.30 
तत्र मां प्राहसत् कृष्ण: पार्थेन सह सुस्वरम्।
द्रौपदी च सह स्त्रीभिर्व्यथयन्ती मनो मम॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ श्रीकृष्ण और अर्जुन मेरी ओर देखकर जोर-जोर से हँसने लगे। द्रौपदी और अन्य स्त्रियाँ भी हँस रही थीं, जिससे मेरा हृदय दुख रहा था।
 
There Shri Krishna and Arjun started laughing loudly looking at me. Draupadi along with the other women were also laughing, hurting my heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)