Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.58.27-28: यदि उस समय मुझमें सामर्थ्य होता, तो मैं भीमसेन को वहीं मार डालता। हे राजन! यदि मैं भीमसेन को मारने का प्रयत्न करता, तो मेरी भी शिशुपाल जैसी ही दशा होती; इसमें संशय नहीं है। भरत! शत्रुओं द्वारा किया गया उपहास मुझे जला देता है। 27-28। | mahabharat अध्याय 2.58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र स्म यदि शक्त: स्यां पातयेऽहं वृकोदरम्।
यदि कुर्यां समारम्भं भीमं हन्तुं नराधिप॥ २७॥
शिशुपाल इवास्माकं गति: स्यान्नात्र संशय:।
सपत्नेनावहासो मे स मां दहति भारत॥ २८॥
अनुवाद
यदि उस समय मुझमें सामर्थ्य होता, तो मैं भीमसेन को वहीं मार डालता। हे राजन! यदि मैं भीमसेन को मारने का प्रयत्न करता, तो मेरी भी शिशुपाल जैसी ही दशा होती; इसमें संशय नहीं है। भरत! शत्रुओं द्वारा किया गया उपहास मुझे जला देता है। 27-28।
If I had been capable at that time, I would have killed Bhimasena right there. O King! If I had tried to kill Bhimasena, I would have met with the same fate as Shishupal; there is no doubt about it. Bhaarat! The mockery done by the enemy burns me. 27-28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥