Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.58.25-26: भरत! मायासुर ने बिन्दु-सरोवर से लाए गए रत्नों से एक कृत्रिम तालाब बनाया था, जो स्फटिक की शिलाओं से ढका हुआ है। मुझे ऐसा प्रतीत हुआ मानो वह जल से भरा हुआ हो। भरत! जब मैं उसमें उतरने के लिए अपने वस्त्र उठाने लगा, तो भीमसेन जोर से हँस पड़े। मैं शत्रु की विशेष समृद्धि के कारण मूर्ख बन रहा था और मैं पहले से ही रत्नों से रहित था। 25-26। | mahabharat अध्याय 2.58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरत! मायासुर ने बिन्दु-सरोवर से लाए गए रत्नों से एक कृत्रिम तालाब बनाया था, जो स्फटिक की शिलाओं से ढका हुआ है। मुझे ऐसा प्रतीत हुआ मानो वह जल से भरा हुआ हो। भरत! जब मैं उसमें उतरने के लिए अपने वस्त्र उठाने लगा, तो भीमसेन जोर से हँस पड़े। मैं शत्रु की विशेष समृद्धि के कारण मूर्ख बन रहा था और मैं पहले से ही रत्नों से रहित था। 25-26।
Bharata! Mayasura had built an artificial pond with the gems brought from Bindu-Sarovar, which is covered with rocks of crystal. It appeared to me as if it was filled with water. Bharata! When I started lifting my clothes to get into it, Bhimsena laughed loudly. I was becoming foolish due to the special prosperity of the enemy and I was already devoid of gems. 25-26.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥