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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.58.23 
उपस्थितानां रत्नानां श्रेष्ठानामर्घहारिणाम्।
नादृश्यत पर: पारो नापरस्तत्र भारत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! राजाओं द्वारा लाए गए उत्तम और बहुमूल्य रत्नों का खजाना इतना प्रचुर था कि वह सबकी दृष्टि से परे था।
 
Bharat! The treasure of the finest and most precious gems brought there by the kings was so abundant that it was beyond all sight. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)