श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.58.17 
दुर्योधन उवाच
अश्नाम्याच्छादयामीति प्रपश्यन् पापपूरुष:।
नामर्षं कुरुते यस्तु पुरुष: सोऽधम: स्मृत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन बोला - मैं अच्छा खाता हूँ और अच्छा वस्त्र पहनता हूँ, परंतु इतना सब होने पर भी जो पापी मनुष्य अपने शत्रुओं से ईर्ष्या नहीं करता, वह नीच माना जाता है ॥17॥
 
Duryodhana said - I eat well and wear good clothes, but despite all this a sinful man who does not feel jealous of his enemies is considered to be mean. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)