श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 58: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दु:ख और चिन्ताका कारण बताना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  2.58.14-15 
भ्रातृज्येष्ठ: स्थितो राज्ये विन्दसे किं न शोभनम्।
पृथग्जनैरलभ्यं यद् भोजनाच्छादनं परम्॥ १४॥
तत् प्राप्तोऽसि महाबाहो कस्माच्छोचसि पुत्रक।
स्फीतं राष्ट्रं महाबाहो पितृपैतामहं महत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! आप अपने भाइयों में सबसे बड़े हैं और राजा के पद पर आसीन हैं, फिर कौन-सा शुभ पदार्थ आपको नहीं मिलता? आपको उत्तम भोजन और वस्त्र प्राप्त हैं, जो अन्यों को नहीं मिलते। फिर आप शोक क्यों करते हैं? महाबाहो! आपके पूर्वजों का यह महान राष्ट्र धन-धान्य से परिपूर्ण है॥ 14-15॥
 
‘Mahabaho! You are the eldest among your brothers, and are thus placed in the position of a king, what auspicious thing do you not get? You have the best food and clothing that is unavailable to others. Then why do you grieve? Mahabaho! This great nation of your forefathers is full of wealth and grains.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)