श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.57.9 
आच्छादयसि प्रावारानश्नासि विशदौदनम्।
आजानेया वहन्त्यश्वा: केनासि हरिण: कृश:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तुम महँगे वस्त्र पहनते हो, उत्तम शुद्ध चावल खाते हो और उत्तम नस्ल के घोड़े तुम पर सवार होते हैं; फिर किस कष्ट के कारण तुम गोरे और दुबले हो गए हो?॥9॥
 
You wear costly clothes, eat fine, pure rice, and good breed horses ride on you; then due to which affliction have you become white and thin?॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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