श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.57.6 
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधन कुतोमूलं भृशमार्तोऽसि पुत्रक।
श्रोतव्यश्चेन्मया सोऽर्थो ब्रूहि मे कुरुनन्दन॥ ६॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र दुर्योधन के पास गए और बोले - "पुत्र दुर्योधन! तुम्हारे दुःख का कारण क्या है? मैंने सुना है कि तुम बड़े कष्ट में हो। कुरुपुत्र! यदि यह बात मेरे सुनने योग्य हो तो मुझे वह बात बताओ।"
 
Dhritarashtra went to Duryodhan and said - Son Duryodhan! What is the reason for your sadness? I have heard that you are in great trouble. Son of Kuru! If it is worth my listening then tell me that thing.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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