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mahabharat 2.57.59: विदुर! मेरा निर्णय युधिष्ठिर को मत बताना; यह मैं तुम्हें बता रहा हूँ। मैं भी मानता हूँ कि वह ईश्वर शक्तिशाली है, जिसकी प्रेरणा से यह द्यूत-क्रीड़ा प्रारम्भ होने जा रही है।   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.57.59 
न वाच्यो व्यवसायो मे विदुरैतद् ब्रवीमि ते।
दैवमेव परं मन्ये येनैतदुपपद्यते॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
विदुर! मेरा निर्णय युधिष्ठिर को मत बताना; यह मैं तुम्हें बता रहा हूँ। मैं भी मानता हूँ कि वह ईश्वर शक्तिशाली है, जिसकी प्रेरणा से यह द्यूत-क्रीड़ा प्रारम्भ होने जा रही है।
 
Vidur! Do not tell my decision to Yudhishthira; I am telling you this. I also believe that the God is powerful, due to whose inspiration this game of dice is going to start.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)