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mahabharat 2.57.58: तुम शीघ्र ही अपने वायु के समान वेगवान घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर खाण्डवप्रस्थ जाओ और युधिष्ठिर को ले आओ। 58   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.57.58 
गच्छ त्वं रथमास्थाय हयैर्वातसमैर्जवे।
खाण्डवप्रस्थमद्यैव समानय युधिष्ठिरम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
तुम शीघ्र ही अपने वायु के समान वेगवान घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर खाण्डवप्रस्थ जाओ और युधिष्ठिर को ले आओ। 58
 
You should go to Khandavaprastha immediately on your chariot drawn by horses as swift as the wind and bring Yudhishthira. 58
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)