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श्लोक 2.57.58  |
गच्छ त्वं रथमास्थाय हयैर्वातसमैर्जवे।
खाण्डवप्रस्थमद्यैव समानय युधिष्ठिरम्॥ ५८॥ |
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| अनुवाद |
| तुम शीघ्र ही अपने वायु के समान वेगवान घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर खाण्डवप्रस्थ जाओ और युधिष्ठिर को ले आओ। 58 |
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| You should go to Khandavaprastha immediately on your chariot drawn by horses as swift as the wind and bring Yudhishthira. 58 |
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