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mahabharat 2.57.56: शुभ हो या अशुभ, लाभदायक हो या हानिकारक, यह पासा का खेल मित्रों के बीच अवश्य आरंभ होना चाहिए। निस्संदेह, यह सौभाग्य से ही प्राप्त होता है ॥ 56॥   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.57.56 
अशुभं वा शुभं वापि हितं वा यदि वाहितम्।
प्रवर्ततां सुहृद्‍द्यूतं दिष्टमेतन्न संशय:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
शुभ हो या अशुभ, लाभदायक हो या हानिकारक, यह पासा का खेल मित्रों के बीच अवश्य आरंभ होना चाहिए। निस्संदेह, यह सौभाग्य से ही प्राप्त होता है ॥ 56॥
 
Whether it is auspicious or inauspicious, beneficial or harmful, this game of dice must begin amongst friends. Undoubtedly, it is achieved by good fortune. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)