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mahabharat 2.57.54: विदुर ने कहा - हे राजन! मुझे आपका यह निर्णय अच्छा नहीं लग रहा। हे प्रभु! आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि जुए में आपके पुत्रों और पाण्डु के पुत्रों में कोई भेदभाव न हो।   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.57.54 
विदुर उवाच
नाभिनन्दामि ते राजन् व्यवसायमिमं प्रभो।
पुत्रैर्भेदो यथा न स्याद् द्यूतहेतोस्तथा कुरु॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
विदुर ने कहा - हे राजन! मुझे आपका यह निर्णय अच्छा नहीं लग रहा। हे प्रभु! आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि जुए में आपके पुत्रों और पाण्डु के पुत्रों में कोई भेदभाव न हो।
 
Vidura said - O King! I do not like this decision of yours. O Lord! You should try in such a way that there is no discrimination between your sons and the sons of Pandu in gambling. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)