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mahabharat 2.57.53: विदुरजी अपने बड़े भाई धृतराष्ट्र के पास गए और उनके चरणों पर सिर नवाकर इस प्रकार बोले ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.57.53 
सोऽभिगम्य महात्मानं भ्राता भ्रातरमग्रजम्।
मूर्ध्ना प्रणम्य चरणाविदं वचनमब्रवीत्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
विदुरजी अपने बड़े भाई धृतराष्ट्र के पास गए और उनके चरणों पर सिर नवाकर इस प्रकार बोले ॥53॥
 
Vidur went to his great brother Dhritarashtra and bowed his head at his feet and said thus. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)