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mahabharat 2.57.51: विदुर से परामर्श किए बिना वे कोई निर्णय नहीं ले सकते थे। जुए के दुष्परिणामों को जानते हुए भी, वे अपने पुत्र-प्रेम के कारण उसकी ओर आकर्षित हुए। 51.   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.57.51 
अपृष्ट्वा विदुरं स्वस्य नासीत् कश्चिद् विनिश्चय:।
द्यूते दोषांश्च जानन् स पुत्रस्नेहादकृष्यत॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
विदुर से परामर्श किए बिना वे कोई निर्णय नहीं ले सकते थे। जुए के दुष्परिणामों को जानते हुए भी, वे अपने पुत्र-प्रेम के कारण उसकी ओर आकर्षित हुए। 51.
 
He could not make any decision without consulting Vidura. Even after knowing the ill-effects of gambling, he was drawn towards it out of love for his son. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)