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mahabharat 2.57.5: उसे शत्रुओं से कोई असह्य कष्ट मिला है। आप उसकी ठीक से जाँच क्यों नहीं करते? दुर्योधन आपका ज्येष्ठ पुत्र है। उसके हृदय में बड़ा दुःख है। आप उसे ढूँढ़ने का प्रयत्न क्यों नहीं करते?॥5॥   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.57.5 
न वै परीक्षसे सम्यगसह्यं शत्रुसम्भवम्।
ज्येष्ठपुत्रस्य हृच्छोकं किमर्थं नावबुध्यसे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उसे शत्रुओं से कोई असह्य कष्ट मिला है। आप उसकी ठीक से जाँच क्यों नहीं करते? दुर्योधन आपका ज्येष्ठ पुत्र है। उसके हृदय में बड़ा दुःख है। आप उसे ढूँढ़ने का प्रयत्न क्यों नहीं करते?॥5॥
 
He has received some unbearable trouble from the enemies. Why don't you examine him properly? Duryodhana is your eldest son. There is great sorrow in his heart. Why don't you try to find him?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)