श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.57.43 
धृतराष्ट्र उवाच
क्षत्ता मन्त्री महाप्राज्ञ: स्थितो यस्यास्मि शासने।
तेन संगम्य वेत्स्यामि कार्यस्यास्य विनिश्चयम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - "सर्वज्ञ विदुर मेरे मंत्री हैं, जिनकी आज्ञा से मैं कार्य करता हूँ। उनसे मिलकर और विचार-विमर्श करके मैं समझ सकूँगा कि इस कार्य के विषय में क्या निश्चय करना चाहिए।" ॥43॥
 
Dhritarashtra said, "Vidura, the wisest of all, is my minister, according to whose orders I act. After meeting him and discussing the matter, I will be able to understand what should be decided regarding this task." ॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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