श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.57.40 
नियतं तं विजेष्यामि कृत्वा तु कपटं विभो।
आनयामि समृद्धिं तां दिव्यां चोपाह्वयस्व तम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैं अवश्य ही छल से युधिष्ठिर को जीतकर उनकी दैवी सम्पत्ति यहाँ ले आऊँगा; अतः आप उन्हें बुलाइए ॥40॥
 
O Lord, I shall certainly conquer Yudhishthira by deceit and bring back his divine wealth here; therefore, you call him. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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