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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 39h
 
 
श्लोक  2.57.39h 
द्यूतप्रियश्च कौन्तेयो न च जानाति देवितुम्।
 
 
अनुवाद
कुंती पुत्र युधिष्ठिर को जुआ खेलना बहुत पसंद है, लेकिन वह इसे खेलना नहीं जानता। 38 1/2
 
Kunti's son Yudhishthira loves to gamble, but he does not know how to play it. 38 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)