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श्लोक 2.57.34  |
सर्वरत्नान्युपादाय पार्थिवा वै जनेश्वर।
यज्ञे तस्य महाराज पाण्डुपुत्रस्य धीमत:॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| जनेश्वर! बुद्धिमान पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर के उस यज्ञ में भूपालगण समस्त रत्नों की भेंट लेकर आये थे। 34॥ |
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| Janeshwar! In that yajna of wise Pandunandan Yudhishthir, Bhupalgan had brought gifts of all the gems. 34॥ |
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