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mahabharat 2.57.31: जब एक लाख ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता था, तो उसके लिए एक संकेत निर्धारित किया जाता था; प्रतिदिन जब एक लाख की संख्या पूरी हो जाती थी, तो जोर से शंख बजाया जाता था।   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.57.31 
पूर्णे शतसहस्रे तु विप्राणां परिविष्यताम्।
स्थापिता तत्र संज्ञाभूच्छङ्खो ध्मायति नित्यश:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जब एक लाख ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता था, तो उसके लिए एक संकेत निर्धारित किया जाता था; प्रतिदिन जब एक लाख की संख्या पूरी हो जाती थी, तो जोर से शंख बजाया जाता था।
 
When food was served to one lakh Brahmins, a signal was set for it; every day when the number of one lakh was completed, the conch was blown loudly. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)