Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.57.21: पृथ्वीपत! उस महान यज्ञ में भूपालगण कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर के लिए नाना प्रकार के रत्न लेकर आये थे॥21॥   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.57.21 
पृथग्विधानि रत्नानि पार्थिवा: पृथिवीपते।
आहरन् क्रतुमुख्येऽस्मिन् कुन्तीपुत्राय भूरिश:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीपत! उस महान यज्ञ में भूपालगण कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर के लिए नाना प्रकार के रत्न लेकर आये थे॥21॥
 
Prithvipat! In that great yagya, Bhupalgan had brought many different types of gems for Kunti's son Yudhishthir. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)