Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.57.14: भारत! संतोष लक्ष्मी और अभिमान का नाश करता है। दया और भय - ये दोनों भी एक ही हैं। इनसे (संतोष आदि से) युक्त मनुष्य कभी उच्च पद प्राप्त नहीं कर सकता। | mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भारत! संतोष लक्ष्मी और अभिमान का नाश करता है। दया और भय - ये दोनों भी एक ही हैं। इनसे (संतोष आदि से) युक्त मनुष्य कभी उच्च पद प्राप्त नहीं कर सकता।
Bharat! Contentment destroys Lakshmi and pride. Compassion and fear-these two are also the same. A man with these (contentment etc.) can never achieve a high position.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥