श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.57.12 
दुर्योधन उवाच
अश्नाम्याच्छादये चाहं यथा कुपुरुषस्तथा।
अमर्षं धारये चोग्रं निनीषु: कालपर्ययम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, "पिताजी! मैं अच्छा खाता-पीता हूँ, अच्छा पहनता हूँ, परन्तु कायरों जैसा हूँ। मैं समय के परिवर्तन की प्रतीक्षा करता हूँ और मेरे मन में बड़ी ईर्ष्या रहती है।" 12.
 
Duryodhan said, "Father! I eat and dress well, but like a coward. I wait for the change of time and bear great jealousy in my heart." 12.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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