Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.56.3: हे शत्रुओं का नाश करने वाले राजन! आपने पाण्डवों के विरुद्ध बार-बार षड्यन्त्र रचा, किन्तु अपने सौभाग्य की कृपा से वे श्रेष्ठ पुरुष उन सब क्लेशों से मुक्ति पाते रहे॥3॥   |   mahabharat अध्याय 2.56: पाण्डवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये शकुनि और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 56: पाण्डवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये शकुनि और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.56.3 
आरब्धाश्च महाराज पुन: पुनररिंदम।
विमुक्ताश्च नरव्याघ्रा भागधेयपुरस्कृता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले राजन! आपने पाण्डवों के विरुद्ध बार-बार षड्यन्त्र रचा, किन्तु अपने सौभाग्य की कृपा से वे श्रेष्ठ पुरुष उन सब क्लेशों से मुक्ति पाते रहे॥3॥
 
O King, destroyer of enemies! You repeatedly plotted against the Pandavas, but by the grace of their good fortune, those best of men kept on getting relief from all those troubles. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)