Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.56.19: शकुनि बोले, "हे राजन! कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को जुआ खेलना बहुत प्रिय है, किन्तु वे इसे खेलना नहीं जानते। यदि महाराज युधिष्ठिर को जुआ खेलने के लिए बुलाया जाए, तो वे पीछे नहीं हट सकेंगे।" | mahabharat अध्याय 2.56: पाण्डवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये शकुनि और दुर्योधनकी बातचीत । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शकुनिरुवाच
द्यूतप्रियश्च कौन्तेयो न स जानाति देवितुम्।
समाहूतश्च राजेन्द्रो न शक्ष्यति निवर्तितुम्॥ १९॥
अनुवाद
शकुनि बोले, "हे राजन! कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को जुआ खेलना बहुत प्रिय है, किन्तु वे इसे खेलना नहीं जानते। यदि महाराज युधिष्ठिर को जुआ खेलने के लिए बुलाया जाए, तो वे पीछे नहीं हट सकेंगे।"
Shakuni said, "O King! Kunti's son Yudhishthira loves gambling very much, but he does not know how to play it. If Maharaja Yudhishthira is called for gambling, he will not be able to back out."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥