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mahabharat 2.56.17: हे राजन! मैं वह उपाय जानता हूँ जिससे युधिष्ठिर अपने को परास्त कर सकते हैं। उसे सुनो और अपनाओ ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 2.56: पाण्डवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये शकुनि और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 56: पाण्डवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये शकुनि और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.56.17 
अहं तु तद् विजानामि विजेतुं येन शक्यते।
युधिष्ठिरं स्वयं राजंस्तन्निबोध जुषस्व च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं वह उपाय जानता हूँ जिससे युधिष्ठिर अपने को परास्त कर सकते हैं। उसे सुनो और अपनाओ ॥17॥
 
O King! I know the method by which Yudhishthira can defeat himself. Listen to it and adopt it. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)