Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.55.34: सम्पूर्ण जगत् का साम्राज्य, शत्रुओं के पास इतना धन और रत्नों का समूह तथा इतना महान राजसूय-यज्ञ देखकर मेरे जैसा कौन मनुष्य चिन्तित न होगा? ॥34॥ | mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ईश्वरत्वं पृथिव्याश्च वसुमत्तां च तादृशीम्।
यज्ञं च तादृशं दृष्ट्वा मादृश: को न संज्वरेत्॥ ३४॥
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् का साम्राज्य, शत्रुओं के पास इतना धन और रत्नों का समूह तथा इतना महान राजसूय-यज्ञ देखकर मेरे जैसा कौन मनुष्य चिन्तित न होगा? ॥34॥
Seeing the empire of the entire world, such wealth and precious stones that the enemies have, and such a great Rajasuya-yagya, which man like me would not be worried? ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥